Explore the world of YouTube with my dedicated section “Out in the Field” wherein I wish to

bring stories on happenings around us with a newsy angle and Climate is certainly one of

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चेरापूंजी में जलवायु परिवर्तन          Prof(Dr) Sanjay Mohan Johri

बचपन से हम जनरल नॉलेज की किताबों में यही पढ़ते आए हैं कि भारत के उत्तर पूर्व में स्थित मेघालय राज्य के चेरापूंजी देश का ही नहीं पूरी दुनिया का सबसे अधिक बारिश वाला शहर है ! अगर आप चेरापूंजी गए होंगे तो आपने देखा होगा हमेशा पानी बरसने से यहाँ मौसम नमी से भरा रहता है ! लोगों का पहनावा, खान-पान और काम-काज सब कुछ मैदानी इलाको में रहने वाले लोगों से बिलकुल अलग होता है !

बढ़ती इंसानी महत्वाकांक्षा की भेंट चढ़ते टिमटिमाते – जुगनू || Prof(Dr) Sanjay Mohan Johri

बढ़ती इंसानी महत्वाकांक्षा की भेंट चढ़ते टिमटिमाते “जुगनू” ज़रा याद करिए बचपन के उन दिनों की जब रात के अंधेरे में, घर की छतों पर, कभी घर के बगीचे में तो कभी तालाब के पास – हमको जुगनू दिख जाया करते थे। दुनिया में शायद ही कोई होगा जिसे जुगनुओं को टिमटिमाते देखना पसंद न हो। 

जलवायु परिवर्तन चूहों की आबादी को बढ़ाने में अनुकूल || Prof(Dr) Sanjay Mohan Johri

चूहों से केवल भारतीय परेशान नही हैं, बल्कि पूरी दुनिया इससे त्रस्त है। एक शोध से बात निकलकर आई है कि दुनिया भर के प्रमुख शहरों में चूहों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। और इनकी संख्या में बढ़ोतरी का कारण जलवायु परिवर्तन बताया जा रहा हैं। यह परेशानी तब और बढ़ जाती है जब विज्ञान भी अपने शोधों के दम पर इस बात को सही ठहराता है 

चाहे भारत की गंगा-यमुना नदी हो, या अमेरिका की मिसीसिपी या फिर चीन की पीली नदी – दुनिया की कई नदियां पॉल्यूशन की प्रॉब्लम से जूझ रही हैं, जिन्हें सुधारने के लिए की गई कोशिशें नाकाफी साबित हुईं हैं भारत में नदियों को काफी पवित्र माना जाता है, नदियों से लोगो की आस्था जुडी हुई है

जलवायु परिवर्तन और पक्षियों के प्रवास के बदलते स्वरूप आपने अक्सर देखा होगा मौसम के परिवर्तन के अनुसार देश-विदेश में प्रवासी पक्षी या Migratory Birds एक स्थान से दूसरी जगह के लिए हज़ारों किलोमीटर की उड़ान भर कर पहुँचते हैं और सदियों से पक्षियों की प्रजातियां पूर्वानुमानित मार्गों और समय का पालन करते रहे हैं ! 

पिछले बीते वर्षों में मौसम का मिजाज लगातार बदला-बदला सा नजर आ रहा है ! अगर 2024 को देखें तो अबकी बार उत्तर भारत में वैसी ठंड ही नहीं पड़ी जैसी की हर साल होती थी ! ठंड के बजाय मौसम सर्द की जगह गर्म रहा और इस परिवर्तन से हर कोई हैरान ही नहीं बल्कि परिवर्तन के खतरे का संकेत दे रहा है ! 

वसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता हैं. इस ऋतु में न तो ज्यादा सर्दी पड़ती हैं. और न ही ज्यादा गर्मी और बारिश ! होली का त्योहार इसी ऋतु में मनाया जाता हैं. लेकिन जलवायु परिवर्तन की मार देखिये तो करीब पांच दशक से सर्दियों के बाद सीधे तेज गर्मी के मौसम की शुरुआत की प्रवृत्ति देखी जा रही है। वसंत का मौसम छोटा होता जा रहा है वैज्ञानिकों के समूह “क्लाइमेट सेंट्रल” के शोधकर्ताओं के आंकड़ों……

हम जब भी जलवायु परिवर्तन की बात करते हैं तो हमारा ध्यान “सस्टेनेबिलिटी” और Sustainable Development Goals या SDG की तरफ चला जाता है ! सारांश में इसका मतलब यह है कि हमको अपने प्राकृतिक संसाधनों का इस तरह उपयोग करना है कि वे वापस प्रकृति में लौट सकें। या यूं समझें वर्तमान की जरूरतों को पूरा करना और साथ ही यह सुनिश्चित करना कि भविष्य की पीढियां भी अपनी जरूरतें पूरी कर सकें क्योंकि आज दुनिया तेजी से बदल रही है।

आपका वाहन किसी चौराहे पर रुका नहीं और आपके इर्द-गिर्द भीख मांगते बच्चों की भीड़ लग जाना एक आम बात है ! कभी आप उन्हें कुछ दे भी देते होंगे, तो कभी डांटकर आगे बढ़ जाते होंगे। पर क्या कभी आपने यह सोचा है कि इनकी दुनिया कैसी है? इनके सपने या परिस्थिति क्या हैं? क्या ये भी अपनी उम्र के दूसरे बच्चों की तरह स्कूल जाना चाहते हैं? ये अपनी मर्जी से भीख मांगते हैं या इनसे जबरदस्ती भीख मंगवायी जाती है?

प्रौद्योगिकी और विज्ञान की तरक्की ने जहां हमें एक बेहतर जीवन जीने के साधन दिए हैं, वहीं हमने पर्यावरण को संतुलित रखने की अपनी जिम्मेदारी को कहीं पीछे छोड़ दिया है। इस कारण, हमारे चारों ओर प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। आज के इस आधुनिक युग में मानव जीवन की गति इतनी तेज हो चुकी है कि वह प्रकृति के साथ तालमेल बैठाने में चूक रहा है। हमें केवल “प्रकृति के उपभोक्ता” बनने के बजाय, “प्रकृति के सेवक”………..

शहर की भाग दौड़ भरी जिंदगी में यह तो आप सब मानेंगे कि अगर एक दिन भी काम करने वाली घरेलू मेड यदि न आए तो घर तितर-बितर हो जाता है ख़ासतौर पर वो घर जहां पति-पत्नी दोनों ही काम पर जाते हैं ! मेड आज के समय में ज़्यादातर मध्यमवर्गीय परिवारों की ज़रूरत बन चुकी हैं ! कई घरों में तो पहली चाय से लेकर रात के खाने तक की ज़िम्मेदारी भी इन्हीं पर होती है ! …….

आपने अक्सर मैले कुचैले वेष में नंगे पैर और हाथ में एक बोरा लिए कचरे के ढेर में दिन भर भटकते बच्चों को देखा होगा ! निश्चित रूप से पढाई या फिर स्कूल जैसी जगह इन्होने नहीं देखी बल्कि बचपन से अपने ही माता-पिता द्वारा जबरन कचरा बीनने में लगा दिए जाते हैं। कुछ बच्चे अगर स्कूल जाना शुरू भी करते हैं तो माता-पिता के लिए इनका स्कूल छोड़ देना ही बेहतर होता है ……….

बड़े शहरों में रहते हुए हमें शायद इस बात का कोई अंदाजा न हो कि ‘बीज’ हमारे लिए कितने जरूरी होते हैं. मगर, उत्तराखंड में रहने वाले विजय जड़धारी भारतीय बीजों की अहमियत को अच्छे से जानते और समझते रहे हैं और यही कारण है कि कई दशकों से इस किसान ने ‘बीजों के संरक्षण’ के लिए आंदोलन छेड़ रखा है. बीजों को बचाने के लिए विजय ने 1986 में ‘बीज बचाओ आंदोलन’ शुरू किया था, जोकि अब तक जारी है………..

क्या आपको पता है धरती पर मौजूद पेड़ों की हर तीन में से एक प्रजाति पर विलुप्त होने का खतरा है. एक अनुमान के अनुसार दुनिया भर में पेड़ों की लगभग 58,000 प्रजातियां हैं.और इनमें से 16,000 से अधिक प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा है. ‘इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ‘(आईयूसीएन) की ‘रेड लिस्ट ऑफ थ्रेटेंड स्पीशीज‘ के तहत एक व्यापक अध्ययन के लिए 47,000 से अधिक प्रजातियों का आकलन किया गया. इस अध्ययन में 1,000 से ज्यादा विशेषज्ञ शामिल थे…….

भारत में पिछले पांच वर्षों के दौरान डेंगू के मामलों में करीब 84 फीसदी की वृद्धि हुई है और जलवायु परिवर्तन के चलते आशंका है इनमें अगले 26 वर्षों में 60 फीसदी तक बढ़ने के संकेत हैं ! आपने देखा होगा पिछले कुछ वर्षों में डेंगू-चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा ही नहीं विश्व के अन्य देशों में बराबर बढ़ रहा है और वैज्ञानिक जलवायु में आते बदलावों के चलते इस बात का खतरा बता रहे हैं कि 2050 तक डेंगू के मामलों में 40 से 60 फीसदी की वृद्धि हो सकती है।…………

हम खुश क्यों नहीं रह पाते ….. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में “तनाव” यानी “स्ट्रेस” एक आम समस्या बन गई है। आज के समय में चाहे वर्क प्रेशर हो या निजी समस्याएं, हर कोई किसी न किसी रूप में तनाव महसूस कर रहा होता है। अक्सर मैंने परिवार और दोस्तों के बीच बातचीत में अगर कोई एक बात सामान्य रूप से करते हुए देखा है तो वह है तनाव या कहिये टेंशन

अभी दिल्ली और उत्तरी भारत के कई शहर वायु प्रदूषण को झेल ही रहे थे कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया है जहाँ वायु गुणवत्ता का सूचकांक 1100 AQI के आंकड़े को पार कर गया ! लाहौर न केवल आज की तारीख़ में ‘गैस चैंबर’ बन गया है, बल्कि यहाँ हजारों लोग बीमार पड़े हैं और एक प्रकार से लॉकडाउन की नौबत आ चुकी है………

दिल्ली में पिछले वर्षों से बढ़ते वायु प्रदूषण के समय बहुत चला लेकिन यह नहीं पता था कि आज यह एक क्रूर सच बन जायेगा ! दिल्ली की हवा में सांस लेना हर रोज़ करीब 40 से 50 सिगरेट पीने के बराबर है और यह सिर्फ़ फैशनेबल आंकड़ेबाज़ी नहीं हैं ! देश और दुनिया की तमाम विशेषज्ञ रिपोर्ट बताती आयी हैं कि विश्व के 30 सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में 20 से अधिक भारत के हैं………..

स्वस्थ और एकांत वातावरण की कमी में विलुप्त होते पक्षी…. पिछले सप्ताह दशहरे के अवसर पर एक स्थानीय समाचार पत्र ने खबर छापी थी कि इस त्यौहार पर दिखने वाला पक्षी नीलकंठ अब नहीं दिखाई पड़ता ! हमें याद है…………

अपने दुःख -दर्द या संवेदनाओं या कहिये भावनाओं को प्रकट करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। आज की भाग-दौड़ और व्यस्तता के समय में हमारा मौखिक रूप से संवाद वैसे ही न के बराबर रह गया है! याद करिये उस दौर की जब हम चिठ्ठी लिखकर यह काम करते थे !……….

क्या आपको पता है दुनिया की सबसे ऊँची छोटी माउंट एवेरेस्ट और ऊँची हो रही है और इसका कारण एक नदी का बहाव है जिसने इसे 15 से 50 मीटर ऊंचा कर दिया है एक ताज़ा अध्ययन के अनुसार ये नदी दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत की तह से चट्टानें और………..

आज से कई वर्षों पहले भारत में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल सोलर स्ट्रीट लाइट से बढ़कर कहीं आगे निकल चुका है। अब घरों और व्यवसायों को बिजली देने से लेकर कृषि और परिवहन तक में सौर ऊर्जा का प्रयोग किया जा रहा है और बिजली की बढ़ती मांग

क्या आप बता सकते हैं आपने पिछली बार फुदकती गोरैया, नाचता मोर अथवा रात में आहट पाकर कच्च कू करते उल्लू को सुनने और देखने का अवसर कब मिला था ! विकास की इस अंधीदौड़ में अब यह ये पक्षी यदा-कदा ही दिखाई पड़ते हैं।

इसमें कोई सन्देह नहीं है कि जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम सबसे अधिक भावी पीढ़ी को भुगतने पड़ेंगे और आने वाले वर्षों में भारत समेत अमेरिका, कनाडा, जापान, न्यूजीलैंड, रूस और ब्रिटेन जैसे सभी विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाएँ जलवायु परिवर्तन के असर से अछूती नहीं रहेंगी………….

पिछले महीने की 30 तारिख की तड़के केरल के वायनाड जिले में हुए भयावह भूस्खलन के लिए इंसानी गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। विशेषज्ञों ने कहा है कि केरल में इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं…………

भीषण गर्मी के बाद देश के कई हिस्सों में मानसून भले ही दस्तक दे चुका है और यहाँ तक की मुंबई जैसे शहर में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है लेकिन यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार भारत में पिछले दो दशकों से वर्षा में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है……….

साल 2024 की भीषण गर्मी और अब मानसून की दस्तक जिसमें कहीं बहुत तेज और लगातार पानी बरसना शुरू हुआ है तो देश के कई इलाके अभी मानसून के इंतज़ार में हैं! आने वाले कुछ दिनों में हम बाढ़ और सूखे की खबरें आप सुनेंगे !………..

क्या गर्मियों के दौरान विशेष रूप से उत्तरी भारत के वह इलाके जहां भीषण गर्मी से कोई राहत नहीं दिखाई पड़ रही कहीं ऐसा तो नहीं हर वर्ष पारा 50 डिग्री सेल्सियस के आसपास छूना एक सामान्य परिदृश्य बन जाये !……….

आइये आज बात करते हैं एक ऐसे विषय की जो शायद हमारे-आपके परिवार में देखने को मिल रहा है ! आजकल यह देखने में आ रहा है कि ज्यादातर युवा शादी से कतराने लगे हैं। वे दोस्ती का रिश्ता तो रखना चाहते हैं और शायद लिव-इन रिलेशनशिप………….

सवाल यह है कि गर्मी बढ़ रही है या हमें ज्यादा महसूस हो रही है ? JE HAAN तापमान भले ही कुछ भी रिकॉर्ड किया जा रहा हो लेकिन गर्मी महसूस हो रही है 50 डिग्री वाली !………….

कुछ याद है आपने पिछली बार कोई फिक्शन , नॉन फिक्शन किताब कब पढ़ी थी ! शायद आज की युवा जनरेशन के लिए यह बता पाना मुश्किल हो क्योंकि आज की ‘टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया’ ने युवाओं में यह आदत बहुत कम होती दिख रही है!…………….

 

अगर आपको आज किसी दूर रह रहे इंसान का हालचाल पूछना हो तो जाहिर है आप तुरंत अपना फोन उठाकर कॉल कर देंगे. आज का वक्त इतना डिजिटल हो गया है कि आप तुरंत वीडियो कॉल करके सामने वाले इंसान से “फेस-टू-फेस”………..

आपको सुनने में ये अजीब लग सकता है. लेकिन क्या आपको पता है कि हम रोज करीब 48 अरब लीटर पानी बर्बाद करते हैं ?………..

उत्तराखंड में गर्मी तेज होने के साथ जंगलों में आग लगी हुई है और बताया जा रहा है पूरे राज्य में 350 से अधिक आग की घटनाएं घटी हैं. अपर प्रमुख वन संरक्षक निशांत वर्मा मुताबिक एक नवंबर 2023 से अब तक जंगल में आग की 373 घटनाएं………..

बीते सप्ताह संयुक्त अरब अमीरात के दुबई और अन्य शहरों में हुई भारी बारिश ने दुनिया को हिला दिया क्योंकि रेगिस्तानी इलाके में यह अप्रत्याशित बारिश असामान्य थी। जहाँ एक तरफ दुबई की बारिश को “क्लाउड सीडिंग” की वजह……..

अक्सर हम सभी सुबह-सुबह कबूतर की “गुटर गूं” आवाज के साथ उठते हैं और निस्संदेह कबूतर की यह आवाज़ किसी गुर्राहट, सिसकारी और सीटी की ध्वनि जैसी होती है । हमारे घर और शहरों में फैली हुई मल्टिस्टोरी बिल्डिंग कबूतर और उनकी प्रणय रीति , सामान्य दृश्य है, जिसमें ये झुककर गुटर गूं करते हैं।……….

Plastic 

बन्दर जाएँ तो जाएँ कहाँ – इनके जंगल तो हमने छीन लिए ! जानवरों की कुछ प्रजातियों के साथ मनुष्य की हमेशा आत्मीयता रही है। शायद यही वजह है कि कुत्ते, बंदर और कबूतर हमेशा से भारतीय जीवन का हिस्सा रहे हैं।……….

पानी के संकट से जूझता बंगलौर शहर आपने अभी हाल ही में अख़बारों और टेलीविज़न चैनल्स में देखा होगा कि भारत का आईटी हब कहा जाना वाला बेंगलुरु शहर इन दिनों हर रोज़ बीस करोड़ लीटर पानी की कमी………..

बात शायद 1983 की है ! मैं PTI में Trainee Journalist था और मुझे दिल्ली Headquarters से देहरादून के Forest Research Institute में तीन दिवसीय Conference को कवर करने के लिए देहरादून जाने का आदेश मिला !…………..

वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक मुद्दे के रूप में उभर कर आया है। जलवायु परिवर्तन कोई एक देश नहीं , यह एक वैश्विक अवधारणा है जो समस्त पृथ्वी के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है। आज भारत सहित पूरी दुनिया में बाढ़, सूखा……….

मेरा हमेशा से मानना है पत्रकारिता और जनसंचार के पाठ्यक्रम में समाचार एजेन्सीज़ या News Agency जर्नलिज्म के बारे में पढ़ाया तो जाता है लेकिन सतही तौर पर क्योंकि एक Academician इस विषय के बारे में आपको केवल किताबी …………

पिछले काफी समय से बहस छिड़ी है कि गोदी मीडिया ( जिसको हम मीडिया पर लगाम लगाने के सन्दर्भ में इस्तेमाल करते हैं) के कारण हम एक स्वस्थ पत्रकारिता नहीं कर पा रहे हैं !………..

हुत पुरानी कहावत है और हमेशा से कहा जाता रहा है कि अगर आपके पास खेत हैं तो आप भाग्यशाली हैं और खेतों को बचाकर रखिए। हालाँकि यह एक अलग विडम्बना है कि जहाँ एक ओर हमारा किसान जलवायु परिवर्तन की मार की वजह से…..

हमारे पैरों के नीचे की ज़मीन को केवल मिट्टी कहकर ख़ारिज करना आसान हो सकता है। लेकिन आपको पता होना चाहिए इसके बिना मानव जाति का अस्तित्व नहीं होगा ! आज एक बार फिर हम जलवायु परिवर्तन के दौर में हमारी मिट्टी दुनिया भर में गंभीर संकट का सामना कर रही है।……….

In conversation with Sangeeta Pandey on the reason behind writing With Love, Sir. The importance of mentor and how he can help the student in shaping them and making their future………..

जलवायु परिवर्तन – मौसम की अनियमितता और हमारे किसान मौसम की अनियमितता – बिगड़ता फसल -चक्र किसानों को भारी नुक़सान “‘ये बात ब‍िल्‍कुल सही है क‍ि ज्‍यादा तापमान से गेहूं की फसलों को नुकसान पहुंचता है।………..

क्या आपको पता है की वर्तमान में हो रहे जलवायु परिवर्तन का एक बड़ा कारण हमारी पुरानी परंपराओं को छोड़ना भी है। यह कोई पुरानी बात नहीं बल्कि शायद 20 साल पहले चूल्हे पर खाना बनाना और फिर उसकी राख से बर्तनों को मजन यह प्रथा हमारे गांव में आज भी प्रयोग में लाई जा रही है……….

महामारी का दौर – पहली, दूसरी, और फिर तीसरी लहर ( अल्फा बीटा, ओमिक्रोन) – ऑफलाइन से ऑनलाइन , फिर काम पर वापसी और बीच में एक बार फिर ऑनलाइन ! …….

What happened in Ayodhya on December 6, 1992, is all history, and Journalists of our time know it……..

Out In The Field – An Introduction